मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
प्रकृति पहेलियाँ
मैग्नेटिक हिल (लेह, लद्दाख) :
लद्दाख में लेह-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग पर समुद्र तल से लगभग 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित
'मैग्नेटिक हिल' (Magnetic Hill) भारत के सबसे आश्चर्यजनक प्राकृतिक चमत्कारों में से एक है। सिंधु नदी
के पास स्थित यह पहाड़ी स्थान अपने गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने वाले भ्रम (Optical Illusion) के लिए
दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ सड़क पर एक विशेष स्थान चिह्नित किया गया है, जहाँ यदि कोई वाहन
न्यूट्रल गियर में खड़ा कर दिया जाए, तो वह बंद इंजन के बावजूद अपने आप पहाड़ी की ढलान पर ऊपर की ओर
खिसकने लगता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आसपास के इलाके के भौगोलिक बनावट के कारण यहाँ दृष्टि का
ऐसा भ्रम पैदा होता है, जिससे ढलान ऊपर की ओर चढ़ाई जैसी प्रतीत होती है। इस अनोखे और अद्भुत अनुभव को
अपनी आँखों से देखने के लिए हर साल हज़ारों पर्यटक और एडवेंचर प्रेमी इस मार्ग पर खिंचे चले आते हैं।
लोकतक झील (मणिपुर) :
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में स्थित लोकतक झील पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है,
जो अपने अनूठे प्राकृतिक स्वरूप के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। इस झील की सबसे बड़ी विशेषता
इस पर तैरते हुए गोलाकार प्राकृतिक द्वीप हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'फुमदी' (Phumdi) कहा जाता
है—ये वनस्पतियों, मिट्टी और जैविक पदार्थों के विशाल तैरते हुए पिंड हैं। लोकतक झील के दक्षिणी
हिस्से में विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान 'केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क' स्थित है, जो
मणिपुर के राज्य पशु और विलुप्तप्राय 'संगाई हिरण' (डांसिंग डियर) का दुनिया में एकमात्र प्राकृतिक
आवास है। शांत नीला जल, अद्भुत तैरते परिदृश्य, नौकायन और दुर्लभ पक्षियों की विविधता के कारण यह
झील प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और पर्यटकों के लिए एक चमत्कारी गंतव्य है।
लिविंग रूट ब्रिज (मेघालय) :
मेघालय के घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में स्थित 'लिविंग रूट ब्रिज' (जीवित जड़ों के पुल) प्रकृति और
मानव की पारंपरिक इंजीनियरिंग के अद्भुत तालमेल का एक विश्वप्रसिद्ध उदाहरण हैं। यहाँ की स्थानीय
खासी और जयंतिया जनजातियाँ सदियों से 'फाइकस इलास्टिका' (रबड़ के पेड़) की द्वितीयक जड़ों को खोखले
सुपारी के तनों के सहारे नदियों और नालों के आर-पार दिशा देकर इन पुलों का निर्माण करती रही हैं।
समय के साथ मजबूत और जीवित रहने वाले ये प्राकृतिक पुल सैकड़ों वर्षों तक बिना किसी सीमेंट या लोहे
के टिके रहते हैं। चेरापूंजी (सोहरा) और नोंगरियाट गांव में स्थित 'डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज'
पर्यटकों और ट्रेकर्स के बीच सबसे लोकप्रिय है। जैव-इंजीनियरिंग की यह अनूठी मिसाल और मेघालय के
वर्षावनों का हरा-भरा वातावरण दुनिया भर के यात्रियों और शोधकर्ताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
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