मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
तमिलनाडु
धार्मिक स्थल
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु):
तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले की थी। इसे उत्तर के काशी के समान ही पूजनीय माना जाता है। समुद्र के किनारे स्थित यह विशाल और भव्य मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट नमूना है, जहाँ लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के बाद दर्शन करते हैं।
रामेश्वरम (दक्षिण):
तमिलनाडु के द्वीप पर स्थित रामेश्वरम धाम भगवान शिव को समर्पित है। रामायण के अनुसार, लंका विजय से पूर्व भगवान श्री राम
ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। इसे 'दक्षिण का वाराणसी' भी कहा जाता है। यहाँ का गलियारा (कॉरिडोर) विश्व के
सबसे लंबे गलियारों में से एक है और यहाँ के पवित्र कुंडों में स्नान का विशेष महत्व है।
🌍 पृथ्वी तत्व: एकम्बरेश्वर मंदिर, कांचीपुरम -
कांचीपुरम में स्थित एकम्बरेश्वर मंदिर पृथ्वी तत्व को समर्पित है, जो स्थिरता और दृढ़ता का प्रतिनिधित्व करता है। यह विशाल
मंदिर परिसर, जिसे पल्लवों और विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा विकसित किया गया था, अपनी प्रभावशाली वास्तुकला और ऊँचे
गोपुरमों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के अंदर एक प्राचीन आम का पेड़ है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह 3,500 साल से भी
अधिक पुराना है, और इसके नीचे ही देवी पार्वती ने भगवान शिव की पूजा की थी। यह मंदिर आध्यात्मिक जड़ें और भौतिक दुनियाके
साथ हमारे गहरे संबंध की याद दिलाता है।
🔥 अग्नि तत्व: अरुणाचलेश्वर मंदिर, तिरुवन्नामलाई -
अरुणाचलेश्वर मंदिर, जो तिरुवन्नामलाई में स्थित है, अग्नि तत्व का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव यहाँअग्नि के
एक विशाल, अंतहीन स्तंभ (लिंग) के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न आदि था और न अंत। यह मंदिर गहन तपस्या औरआत्म-साक्षात्कार
का केंद्र है, जहाँ हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक विशाल दीपक (महादीपम) जलाया जाता है। यह प्रकाश अज्ञान के अंधकार को
दूर करने और भीतर की चेतना को प्रज्वलित करने का प्रतीक है, जो सभी भौतिक बंधनों से परे है।
💧 जल तत्व: जम्बुकेश्वरर मंदिर, तिरुवनाईकवल -
जल तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाला जम्बुकेश्वरर मंदिर तिरुवनाईकवल (तिरुचिरापल्ली के पास) में स्थित है। इस मंदिर का
गर्भगृह एक भूमिगत जल स्रोत के ऊपर बना है, और वहाँ स्थापित लिंगम (जल लिंगम) हमेशा पानी से घिरा रहता है। यह जल जीवन,
शुद्धता और निरंतर परिवर्तन का प्रतीक है। मंदिर की संरचना में कलात्मक बारीकियां हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता है वह
शांति और शीतलता जो जल तत्व की उपस्थिति से आती है। यह मंदिर जीवन के प्रवाह और पवित्रता को दर्शाता है।
🌌 आकाश तत्व: थिल्लाई नटराज मंदिर, चिदंबरम -
आकाश या ईथर तत्व को समर्पित नटराज मंदिर चिदंबरम में स्थित है। आकाश वह तत्व है जिसमें अन्य सभी तत्व
समाहित होते हैं,और यह स्थान चेतना और अनंतता का प्रतीक है। यहाँ, गर्भगृह में कोई मूर्त लिंगम नहीं है,
बल्कि चिदंबरम रहस्यम् नामक एक खाली स्थान है। यह खाली स्थान दर्शाता है कि शिव निराकार हैं और सभी
रूपों से परे हैं। यह मंदिर शिव के ब्रह्मांडीय नर्तक,नटराज,
के रूप में उनकी ऊर्जा को समर्पित है, जो सृजन, संरक्षण और विनाश के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कांचीपुरम (Kanchipuram):
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कांचीपुरम को 'मंदिरों का शहर' कहा जाता है। यह नगरी देवी कामाक्षी का निवास
स्थान
है और शैव व वैष्णव दोनों ही संप्रदायों के लिए अत्यंत पवित्र है। अपनी अद्भुत वास्तुकला और प्राचीन रेशम उद्योग के लिए
प्रसिद्ध यह शहर सदियों से शिक्षा और दर्शन का मुख्य केंद्र रहा है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगरी के रूप में भी सम्मान
प्राप्त
है।