मेरी यात्रा

भारत की ज्ञान की यात्रा

मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा

पर्वत श्रृंखला एवं साहसिक स्थल नेत्रावती पीक
नेत्रावती पीक (कर्नाटक) : ​कर्नाटक के चिकमगलूर जिले में कुद्रेमुख राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित नेत्रावती पीक (Netravathi Peak) पश्चिमी घाट की एक खूबसूरत और शांत पर्वत चोटी है। पवित्र नेत्रावती नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित यह पहाड़ी अपने हरे-भरे घास के मैदानों (Shoa Forests), घुमावदार रास्तों और बादलों से ढकी चोटियों के लिए जानी जाती है। कुद्रेमुख क्षेत्र के अन्य ट्रेक की तुलना में कम भीड़-भाड़ वाला यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य है। मानसून के मौसम में और उसके बाद यहाँ का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता, जहाँ चारों ओर हरियाली और धुंध की चादर बिखरी होती है। यहाँ की मध्यम स्तर की ट्रैकिंग और शांत वातावरण यात्रियों को पश्चिमी घाट की प्राकृतिक सुंदरता का अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।
टाइगर्स नेस्ट - पारो तख्तसांग
टाइगर्स नेस्ट / पारो तख्तसांग (भूटान) : ​पारो घाटी में समुद्र तल से लगभग 3,120 मीटर की ऊँचाई पर एक खड़ी चट्टान पर स्थित पारो तख्तसांग, जिसे 'टाइगर्स नेस्ट' (Tiger's Nest) के नाम से जाना जाता है, भूटान का सबसे पवित्र और प्रतिष्ठित बौद्ध मठ परिसर है। 17वीं शताब्दी के अंत में निर्मित यह मठ उस गुफा के चारों ओर बना है जहाँ 8वीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने एक बाघिन की पीठ पर सवार होकर पहुँचकर तीन साल, तीन महीने और तीन दिन तक ध्यान साधना की थी। चीड़ के घने जंगलों, लटकते प्रार्थना झंडों और बादलों से घिरी गहरी घाटी के बीच बसा यह वास्तुशिल्प चमत्कार दुनिया भर के ट्रेकर्स, तीर्थयात्रियों और फोटोग्राफरों को आकर्षित करता है। खड़ी और रोमांचक चढ़ाई के बाद मठ से दिखने वाला पारो घाटी का विहंगम दृश्य और यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण हर आगंतुक को शांति और विस्मय से भर देता है।
​दोचुला दर्रा
दोचुला दर्रा (भूटान) : ​थिम्पू और पुनाखा के मध्य समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर (10,200 फीट) की ऊँचाई पर स्थित दोचुला दर्रा (Dochula Pass) भूटान का एक बेहद सुरम्य और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रा है। इस दर्रे की सबसे प्रमुख पहचान यहाँ बने 108 स्मारक स्तूप (ड्रुक वांग्याल चोर्टेन) हैं, जिनका निर्माण 2003 के सैन्य अभियान में शहीद हुए भूटानी सैनिकों की स्मृति और देश में शांति स्थापना के लिए राजमाता आशी दोरजी वांगमो वांगचुक द्वारा कराया गया था। साफ़ मौसम में यहाँ से बर्फ़ से ढकी पूर्वी हिमालय की गगनचुंबी चोटियों (जिनमें भूटान की सबसे ऊँची चोटी 'गंगखर पुनसुम' भी शामिल है) का 360-डिग्री विहंगम दृश्य दिखाई देता है। हवा में लहराते रंग-बिरंगे बौद्ध प्रार्थना झंडे, चारों ओर फैली धुंध और सर्दियों में बर्फबारी का नजारा इसे भूटान के सबसे शांत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।

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