भारतीय नववर्ष :
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू पंचांग के अनुसार नव संवत्सर (भारतीय नववर्ष) का पहला और अत्यंत पवित्र दिन
है। धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान ब्रह्मा ने संपूर्ण सृष्टि की
रचना आरंभ की थी और इसी दिन से 'विक्रम संवत' की शुरुआत भी मानी जाती है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में
इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास और विविध रूपों में मनाया जाता है—महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा', आंध्र
प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 'उगादी' तथा कश्मीर में 'नवरेह' के रूप में श्रद्धा के साथ मनाया जाता
है। इसी तिथि से नौ दिनों तक चलने वाले 'चैत्र नवरात्र' का भी शुभारंभ होता है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ
रूपों की उपासना की जाती है। प्रकृति में नए पत्तों और फूलों के आगमन के साथ बसंत के इस समय में यह दिन
नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शुद्धि और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन संदेश
देता है।