जगन्नाथ रथ यात्रा :
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्वप्रसिद्ध भगवान
जगन्नाथ की रथ यात्रा सनातन धर्म के सबसे भव्य, पावन और प्राचीन आध्यात्मिक उत्सवों में से एक है। इस
दिव्य तिथि पर महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने मुख्य गर्भगृह (श्री
मंदिर) से बाहर निकलकर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा मंदिर' की नौ दिवसीय यात्रा पर प्रस्थान करते हैं। नीम
की पवित्र लकड़ी से बने तीन विशाल और सुसज्जित रथों—नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ), तालध्वज (भगवान बलभद्र) और
दर्पदलन (देवी सुभद्रा)—को खींचने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुँचते हैं। मान्यता है कि
रथ की रस्सियों को स्पर्श करने मात्र से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती
है। जाति, धर्म और वर्ग के सभी बंधनों से परे सामाजिक समरसता, अटूट भक्ति और अलौकिक श्रद्धा का प्रतीक
यह महापर्व भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान है।