गुरु पूर्णिमा :
आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व सनातन संस्कृति में
गुरु-शिष्य परंपरा, कृतज्ञता और आत्म-ज्ञान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। महाभारत, वेदों और पुराणों के
रचयिता व संपादक महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास जी की जयंती होने के कारण इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा
जाता है। हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है; मान्यता है कि इसी
पावन तिथि पर भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का
चरण-वंदन, पूजन और आशीर्वाद प्राप्त कर उनके द्वारा दिखाए गए ज्ञान, विवेक और धर्म के मार्ग पर चलने का
संकल्प लेते हैं। अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शकों के प्रति
सम्मान और श्रद्धा अर्पित करने का यह पावन अवसर जीवन में संस्कारों और विद्या की महत्ता को रेखांकित
करता है।