मेरी यात्रा

भारत की ज्ञान की यात्रा

मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा

बद्रीनाथ
​1. बद्रीनाथ (Badrinath): बद्रीनाथ धाम को मुख्य बद्री माना जाता है और यह भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों में से एक है। उत्तराखंड के चमोली ज़िले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित, यह मंदिर नर और नारायण पर्वतों के बीच में है। यहाँ भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी एक मीटर ऊँची, ध्यान मुद्रा वाली काली मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर चार धामों और पंच बद्री में सबसे प्रमुख है। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में इस मूर्ति को नारद कुंड से निकालकर स्थापित किया था। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।
आदि बद्री
​2. आदि बद्री (Adi Badri): आदि बद्री पंच बद्री में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसे सबसे प्राचीन बद्री माना जाता है। यह उत्तराखंड के कर्णप्रयाग से लगभग 17 किलोमीटर दूर, कनवालखेत गाँव के पास स्थित है। यहाँ 16 छोटे मंदिरों का एक समूह है, जिनमें से मुख्य मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जहाँ उनकी एक फुट ऊँची मूर्ति स्थापित है। ऐसा माना जाता है कि जब बद्रीनाथ का मार्ग शीतकाल में बंद हो जाता था, तो भक्त यहाँ दर्शन करने आते थे। यह शांत स्थान ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उत्तराखंड की धार्मिक विरासत को दर्शाता है।
भविष्य बद्री
​3. भविष्य बद्री (Bhavishya Badri): भविष्य बद्री जोशीमठ से तपोवन होते हुए सुभैन के पास स्थित है। भविष्य बद्री का शाब्दिक अर्थ है 'भविष्य का बद्री'। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब कलियुग में नर और नारायण पर्वत (बद्रीनाथ के पास) आपस में मिल जाएँगे और बद्रीनाथ धाम का रास्ता दुर्गम हो जाएगा, तब भक्त इसी स्थान पर भगवान बद्री विशाल के दर्शन करेंगे। वर्तमान में, यहाँ एक छोटा मंदिर है जहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है। यह एक सुंदर और शांत ट्रेकिंग मार्ग पर स्थित है, जो भक्तों को भविष्य में होने वाले धार्मिक परिवर्तन की याद दिलाता है।
योगध्यान बद्री
​4. योगध्यान बद्री (Yogdhyan Badri): योगध्यान बद्री, जिसे योग बद्री भी कहा जाता है, जोशीमठ से लगभग 10 किलोमीटर दूर पांडुकेश्वर गाँव में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वह स्थान है जहाँ राजा पांडु ने अपनी पत्नी कुंती और माद्री के साथ कठोर तपस्या की थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने पुत्रों (पांडवों) की प्राप्ति हुई थी। मंदिर में भगवान विष्णु की योग मुद्रा (ध्यान मुद्रा) में बैठी हुई कांस्य प्रतिमा स्थापित है, इसलिए इसका नाम योगध्यान बद्री पड़ा। बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा के लिए उधोजी की डोली भी यहीं लाई जाती है। यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
वृद्ध बद्री
​5. वृद्ध बद्री (Vriddha Badri): वृद्ध बद्री, जिसका अर्थ है 'पुराना बद्री', पंच बद्री में सबसे अधिक पहुँच योग्य स्थानों में से एक है और जोशीमठ के पास अनीमठ गाँव में स्थित है। किंवदंतियों के अनुसार, यह वह पहला स्थान था जहाँ भगवान बद्रीनाथ ने सबसे पहले वृद्ध (बूढ़े) रूप में प्रकट होकर नारद जी को दर्शन दिए थे। ऐसा भी माना जाता है कि जब तक आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ की मूर्ति को स्थापित नहीं किया था, तब तक इसी स्थान पर पूजा होती थी। मंदिर में भगवान विष्णु की एक वृद्ध स्वरूप की मूर्ति स्थापित है। यह स्थान पूरे वर्ष खुला रहता है और भक्तों को बद्रीनाथ के प्राचीन इतिहास से जोड़ता है।