मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
1. प्रयागराज (उत्तर प्रदेश):
प्रयागराज को 'तीर्थराज' या तीर्थों का राजा कहा जाता है। यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का पावन संगम होता है,
जिसे त्रिवेणी संगम कहते हैं। प्रयागराज का कुंभ अपनी भव्यता और विशालता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ माघ के महीने में कल्पवास
की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहाँ श्रद्धालु महीने भर कठिन संयम के साथ नदी किनारे निवास करते हैं।
2. हरिद्वार (उत्तराखंड):
हिमालय की तलहटी में स्थित हरिद्वार वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पहाड़ों को छोड़कर पहली बार मैदानी इलाकों में प्रवेश करती
है। यहाँ कुंभ का आयोजन हर की पैड़ी पर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गरुड़ जी जब अमृत कलश ले जा रहे थे, तब उसकी कुछ
बूंदें यहाँ ब्रह्मकुंड में गिरी थीं। यहाँ स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति और पापों से मुक्ति मिलने की गहरी मान्यता है।
3. उज्जैन (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुंभ का आयोजन पावन शिप्रा नदी के तट पर होता है। उज्जैन के कुंभ को 'सिंहस्थ कुंभ' के नाम से
जाना जाता है क्योंकि यह तब आयोजित होता है जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। भगवान महाकालेश्वर की नगरी होने के
कारण यहाँ कुंभ का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यहाँ शैव और वैष्णव दोनों मतों के साधु-संत बड़ी संख्या में एकत्रित
होते हैं।
4. नासिक (महाराष्ट्र):
महाराष्ट्र के नासिक में कुंभ मेला गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होता है। इसे 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है। नासिक में कुंभ
का मुख्य केंद्र त्र्यंबकेश्वर है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भगवान राम के वनवास काल से जुड़े होने के कारण नासिक
के पंचवटी क्षेत्र का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। यहाँ स्नान करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलने का विश्वास व्यक्त
किया जाता है।