मेरी यात्रा - भारत की ज्ञान की यात्रा
चार धाम
1. बद्रीनाथ (उत्तर):
उत्तराखंड की अलकनंदा नदी के तट पर स्थित बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। हिमालय की गोद में बसा यह मंदिर नर और
नारायण पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ भगवान विष्णु ने कठोर तपस्या की थी और देवी
लक्ष्मी ने 'बदरी' (बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर उनकी रक्षा की थी। यह धाम केवल गर्मियों के महीनों में दर्शन के लिए खुलता
है।
2. जगन्नाथ पुरी (पूर्व):
ओडिशा के तट पर स्थित जगन्नाथ पुरी वैष्णव संप्रदाय का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण, उनके
भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा की जाती है। इस मंदिर की 'रथ यात्रा' विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा
हवा की विपरीत दिशा में लहराता है, जो आज भी एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।
3. रामेश्वरम (दक्षिण):
तमिलनाडु के द्वीप पर स्थित रामेश्वरम धाम भगवान शिव को समर्पित है। रामायण के अनुसार, लंका विजय से पूर्व भगवान श्री राम
ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। इसे 'दक्षिण का वाराणसी' भी कहा जाता है। यहाँ का गलियारा (कॉरिडोर) विश्व के
सबसे लंबे गलियारों में से एक है और यहाँ के पवित्र कुंडों में स्नान का विशेष महत्व है।
4. द्वारका (पश्चिम):
गुजरात के तट पर स्थित द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि और उनकी राजधानी माना जाता है। गोमती नदी के संगम पर स्थित
द्वारकाधीश मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि मूल द्वारका नगरी समुद्र में विलीन हो गई थी। यह
धाम धर्म और इतिहास के अद्भुत संगम का प्रतीक है और भक्तों को द्वापर युग की याद दिलाता है।